उर्दू और हिन्दी के शब्द कैसे पहचानें? Urdu or hindi ke words ko kaise pahchane?


 हिंदी और उर्दू एक ही क्षेत्र की भाषाएँ हैं। दोनों खड़ी बोली से विकसित हुई हैं। इसलिए दोनों में कई समानताएँ हैं। उर्दू में अरबी और फ़ारसी भाषाओं के शब्द ज़्यादा हैं। ऐसे हज़ारों शब्द हिंदी में भी इस्तेमाल किये जाते हैं। इन अरबी और फ़ारसी के शब्दों को उर्दू शब्द के रूप में पहचाना जाता है!

 उर्दू शब्द :

शुरू, जानवर, चीज़, जानदार, दुनिया, सिर्फ़, अगर, वजह, जरूर, ज़माना, ज़मीन, ज़िन्दा, मुश्किल, सख्त, अजीब, आसान, कसरत, बर्फ, सफ़ेद, दरख्त, दुश्मन, मुल्क, कोशिश, तादाद, दरजा, मालूम, मुमकिन, आदमी, तब्दीली, तरफ़, किस्म, पैदा, दरिया, खुश्की, बाज़, तरक्को, ताकतवर, मिसाल, हिफाजत, फ़ायदा, औज़ार इत्यादि।

सवाल यह है कि उर्दू के शब्दों को कैसे पहचाना जाये। उर्दू शब्द हिंदी में इतने घुलमिल गये हैं कि उनकी पहचान मुश्किल से होती है। शब्दकोश से हम पहचान सकते हैं कि शब्द कौन-सी भाषा से आया है। इसके अलावा जिन शब्दों के नीचे नुक्ता (बिंदी) लगा हो वे आम तौर पर उर्दू के शब्द होते हैं। जैसे बर्फ, तरक्क़ी, तरफ़ आदि। हिंदी के अपने शब्दों में नुक्ते नहीं लगते।

क, ख, ग, ज़, फ्र, सिर्फ अरबी-फ़ारसी शब्दों में आते हैं। ये संस्कृत या हिंदी के शब्दों में नहीं आते। यहाँ यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि अंग्रेजी से आए कुछ शब्दों में भी नुक्ता लगता है जैसे ज़ेबरा, ज़िप, फ़ैक्टरी, फ्रेल आदि। अरबी-फ़ारसी में /क, रा, ज/ के साथ-साथ /क, ग, ज/ की ध्वनियाँ भी हैं। किंतु /ख, फ/ की ध्वनियाँ नहीं है। "फ" "ख" का प्रयोग हिंदी के अपने शब्दों के साथ ही होता है। जैसे फल, सफल, फूल"। यहां "फ़ल, सफ़ल, फूल" नहीं लिखना चाहिए। इस तरह की गलती, लिखने से अधिक बोलने में होती है। अरबी-फ़ारसी में "फ़" का ही प्रयोग होगा। जैसे- फख, फरियाद, फ़साद, फतह, सिर्फ आदि। अरबी-फारसी के कुछ शब्द हिंदी की प्रकृति के अनुसार ढल गये हैं उनको आम प्रचलित रूप में भी लिखा जाता है। जैसे फ़स्ल-फसल। हिंदी के कुछ शब्द देखिए जिनमें /फ/ का प्रयोग होगा न कि /फ्र/ का।

फाटक, फोड़ना, फूटना, सफल, फल, फूल, फाँसी, फाँक, फेफड़े, फहराना।

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