"आज मीना की गोदभराई में मोहल्ले की सभी औरतें पूछ रही थीं कि तू दादी कब बनेगी सुनीता। क्या जवाब दू मैं उन सब को। ब्याह के 3 साल हो गए,अब तक पोते का मुंह नहीं देख पाई। ना जाने किस मनहूस घड़ी में इसे पसंद किया था मेरे बेटे ने।"- सुनीता ऐसे ताने कस रही थी जैसे मानो उसको सुनने के लिए बस दिवारे ही हो वहां उसका पति और बहु नहीं । उधर सिया दरवाजे के पीछे खड़ी सुन रही थीं।
"अरे! ओ मनहूस, सोती रहेगी या चाय भी लाके देंगी। तेरी वजह से इतनी जली कटी सुनने को मिलती है। उसके घर चाय क्या पानी की एक घूट भी नीचे नहीं उतरी" - सुनीता ने सिया को जोर से चिल्लाते हुए आवाज लगाई।
"जी लाई मां"- सिया रूवासी आवाज़ में बोली।
एक ग्लास चाय पीके सुनीता अब रात को अर्पित के आने इंतजार करने लगी।
"अरे! बेटा तू जानता है, वो वर्मा जी, उनके बेटे ने दूसरी शादी कर ली, उसकी बहू बांझ थी ना"। रात खाना खाते वक्त सुनीता अर्पित की थाली में रोटी रखते हुए बोली।
"चुप करो मां जब देखो तब यही सब"।अर्पित ने खीजते हुए कहा।
"जब देखो तब क्या! तुझे छोड़ ये बात सारी दुनिया को समझ आ गई है।" सुनीता सिया की तरफ देखते हुए गुस्से में बोली।
"तुम एक पल भी सुकून से खाना नहीं खाने दोगी मां" अर्पित थाली पटक के कमरे में चला गया।
मां बेटे की इस बहस में न तो सिया कुछ कह सकती थी ना ही अर्पित के बाबू जी।
थोड़ी देर बाद सिया दूध लेके अर्पित के पास गई।
"लीजिए दूध पी लीजिए" - सिया ने कहा।
"तुम कितना सोचती हूं मेरे लिए, पर रख दो मुझे नहीं पीना, आओ मेरे पास"- अर्पित ने बड़ी ही नर्म आवाज में कहा।
"आप जानते है ना जब रात को आपकी बाहों में होती हूं तो मां की कही कोई बात याद नहीं रहती" - सिया ने अर्पित के माथे पर प्यार रखते हुए कहा।
"तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा सिया" - अर्पित ने भी माथे पर प्यार रखते हुए कहा।
"आप दूसरी शादी कर लीजिए ना"- आसूं छुपाते हुए सिया बोली।
"तुम भी मां की तरह पागल हो गई हों।" दरवाज़े को पटकते हुए अर्पित कमरे से बाहर चला गया।
अब सिया की सिसकी सुनने के लिए कमरे की दिवारें और सामने लगी एक बच्चे की तस्वीर ही थी।

इसकी कहानी के लिए जितना लिखूं कम है। बेहद बेहद खूबसूरत कहानी। साथ में यह भी कहना है कही न कही ये सत्य घटना पर आधारित है। आपने कड़वे सच को बेहद खूबसूरत कहानी के रूप में प्रस्तुत किया। नमन है कलम को।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया बेहद आपके इन शब्दो के लिए❣️
हटाएंWaww👏👏
जवाब देंहटाएंशुक्रिया ❣️
हटाएंNishabd
जवाब देंहटाएंउफ्फ शुक्रिया ❣️
हटाएंइस दुनियां में बहुत सारी औरतें है जो इस दर्द को हर रोज सहती है ! इन खूबसूरत लाइनों के जरिये उनका दर्द समझने के लिए धन्यवाद🙏
जवाब देंहटाएंजी। तमाम ऐसी औरते है शायद हर तीसरे घर में देखा जा सकता है।❣️
हटाएंCreative writer with creative mind😎
जवाब देंहटाएंThankyou so much ❣️
हटाएंSuperbb.. ❣️❣️
जवाब देंहटाएंThankyou ❣️
हटाएंNice story..... I have no words .......👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंThankyou so much ❣️
हटाएंBahot khoob
जवाब देंहटाएंशुक्रिया ❣️
हटाएंHmm shab shaleenta
जवाब देंहटाएंजी❣️
हटाएं🙌 दर्द के वास्तविक रूप को मासूमियत से बयां किया 🙌
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आपका❣️
हटाएंठीक लिखा है। बस इस कहानी को सिया की जीत के साथ खत्म करना बन्धु। जैसे मेरे हिसाब से पहले तो वह अपनी सास को जवाब देना सीखे उनको ये अहसास कराये कि उसकी खुद की भी कुछ अहमियत है या नहीं और दूसरी बात अहसास कराने के बाद किसी बच्चे को गोद लेकर भी जीवन को जी सकते हैं
जवाब देंहटाएंह्रदयस्पर्शी आह्लादित दी 🥺🥺🌸🌻🌻🍁🍁🌼🌼🌼
जवाब देंहटाएंह्रदय द्रवित कहानी 🥺🥺