शक्ति


 मेरी अंदुरूनी शक्ति का

अंदाज़ा भी नहीं तुमको,

शेरनी सी तेज गुर्राहट है मेरी,

तेज़ ज्वाला सी तपती मेरी आत्मा है।


शरीर मेरा दुबला हैं,

पर लोहे सी कठोर हूं,

मेरी अंतरात्मा में झांक कर देखो,

वीरान पड़े कई खलियान हैं।

मेरी शक्ति की कोई सीमा नहीं,

इस अर्श जितना विशाल हैं।

भक्ति में ही शक्ति हैं,

और शक्ति ही मेरी पहचान हैं।


धूल में मिला कर रख दूंगी,

खुद पर इतना ही अभिमान हैं।


नारी का रूप लेकर जन्मी हूं,

क्या यही मेरा अभिशाप हैं?

झूठला कर दिखा दूंगी इस दुनिया को

शक्ति ही मेरा हथियार हैं

और यही मेरा आत्मसम्मान हैं।।

- शेफालिका त्रिपाठी



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