दूर पड़े सफेद "कागज़" को, "स्याही " प्यार भरी निगाहों से देख रही थी, कि आखिर कब उसकी नोक कागज़ के कोमल सतह को स्पर्श कर पायेगी, कब वो अपने अंदर भरे सारे प्रेम रस को उस पर उड़ेल कर बताएगी कि वो अपूर्ण हैं, कागज़ के बिना।
वही "मेरे मन " में कविता बुनी जा रही थी और दूसरी ओर कानो में आवाज़ कि " तुम्हारी कलम ही तुम्हारी ताकत है प्रिय! तुम्हारे शब्दों का चयन ही तुम्हे सबसे अलग बनाता है।
- शेफालिका

सुंदर💜
जवाब देंहटाएंशुक्रिया ❤️
हटाएंबेहतरीन
जवाब देंहटाएंशुक्रिया ❤️
हटाएं👏
जवाब देंहटाएं👏👏👏👏👏
जवाब देंहटाएं1 no.
जवाब देंहटाएंAti sunder🔥🔥
जवाब देंहटाएंशुक्रिया ❣️
हटाएंGajab
जवाब देंहटाएंWaww👏
जवाब देंहटाएंशुक्रिया ❣️
हटाएंBhut ache ❣️
जवाब देंहटाएंशुक्रिया ❣️
हटाएंलाजवाब👏👏
जवाब देंहटाएंशुक्रिया❣️
हटाएंGreat❤️
जवाब देंहटाएंThankyou ❣️
हटाएंAtyant savendensheel🙌🏻
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